राजीव वर्मा
हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
‘जाति-जाति’ का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।
धर्म नहीं जो बाँटे मानव को ऊँच-नीच के नाम,
सच्चा धर्म वही जो दे सबको समान सम्मान।
वीर बनें वे कर्मठ नर जो तप में तन्मय हों,
जाति-प्रपंचों से ऊपर जो जनसेवा में रत हों।
वर्ण नहीं कोई जन्मजात जो तय करे अधिकार,
कर्मों से मिलती है जग में सच्चे गौरव की धार।
जो बोले ‘मैं ब्राह्मण हूँ’, पर तप नहीं, न ज्ञान,
वह नर केवल छाया है, न उसमें कोई प्राण।
क्षत्रिय वही जो करे रक्षा, न कि केवल भोगी,
सेवक हो वैश्य वही, जो न देखे केवल लोगी।
शूद्र नहीं वह जो सेवा में है, वह तो सबसे पूज्य,
नीच वही जो बाँट रहा मानव को जाति-भुज।
कायरता है जाति कहें, जब कर्मों में हो खोखल,
बलशाली वह है जगत में, जिसका तप है शोभाल।
उठो युवा! पहचानो खुद को कर्मों से बनो महान,
जातिवाद की जंजीरों को तोड़ो, लो नव प्रस्थान।