राजीव वर्मा
ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर,
बारिशें हों तो भीग जाया कर।
चाँद लाकर कोई नहीं देगा,
अपने चेहरे से जगमगाया कर।
दर्द हीरा है, दर्द मोती है,
दर्द आँखों से मत बहाया कर।
काम ले कुछ हसीन होंठों से,
बातों-बातों में मुस्कुराया कर।
धूप मायूस लौट जाती है,
छत पे किसी बहाने आया कर।
कौन कहता है दिल मिलाने को,
कम से कम हाथ तो मिलाया कर।
तन्हाइयों से यूँ ना घबराया कर,
कभी खुद से भी गुफ्तगू किया कर।
आईने में झाँक कर देख जरा,
कभी खुद को भी सराहा कर।
हर सवाल का जवाब ज़रूरी नहीं,
कभी चुप रह कर भी समझाया कर।
हर मोड़ पर कहानी बदलेगी,
जिंदगी को यूँ ही अपनाया कर।
कभी पगडंडियों से दोस्ती कर,
शहर की दौड़ से छुट्टी लिया कर।
जहाँ दिल सुकून पाता हो,
ऐसी जगहों पर भी जाया कर।
ख्वाब सिर्फ़ सोने के लिए नहीं,
उन्हें हकीकत में आज़माया कर।
जो गिर गए तो शिकवा नहीं,
हर बार खुद को उठाया कर।
जो अपना ना बन सका, कोई बात नहीं,
पर तू खुद से न पराया कर।
ये दिल बहुत कुछ कहता है,
कभी इसकी भी सुन लिया कर।
सपनों का क्या है, हर कोई देखता है,
तू बस हौसलों को जगाया कर।
हर सुबह एक नई शुरुआत है,
कल की फिक्र छोड़, मुस्काया कर।