इज़्ज़त या ज़िल्लत: जीवन में सम्मान और आत्मसम्मान का महत्व

राजीव वर्मा, 28 – जून- 2025

“इज़्ज़त से अगर धूल भी मिले, तो उसे माथे से लगाओ,ज़िल्लत से अगर सिंहासन भी मिले, तो उसे ठुकराओ।”

यह दो पंक्तियाँ केवल शायरी नहीं, बल्कि जीवन का गूढ़ सत्य हैं। ये हमें यह सिखाती हैं कि सम्मान (इज़्ज़त) और स्वाभिमान (आत्मसम्मान) का मूल्य किसी भी भौतिक वस्तु या पद से अधिक होता है।

इज़्ज़त की धूल भी क्यों होती है अनमोल ?

जब कोई व्यक्ति सम्मान के साथ छोटा सा कार्य करता है या सीमित संसाधनों में भी गरिमा बनाए रखता है, तो वह सचमुच सराहनीय होता है।धूल यहाँ एक प्रतीक है – छोटी चीज़ों का, संघर्ष का, या सीमित संसाधनों का। लेकिन जब वही संघर्ष इज़्ज़त के साथ किया जाता है, तो उसका मोल अमूल्य हो जाता है।

उदाहरण: एक मेहनतकश किसान जो दिन-रात खेतों में काम करता है, भले ही उसके पास महंगे कपड़े या बंगले न हों, लेकिन वह सम्मान के योग्य है। उसके हाथों की मिट्टी इज़्ज़त की धूल है – जिसे माथे से लगाना चाहिए।

ज़िल्लत से मिला सिंहासन क्यों त्याग देना चाहिए ?

ज़िल्लत यानी अपमान, अपहेलना या चरित्रहीनता के साथ मिली सफलता – चाहे वह सत्ता हो, पैसा हो या प्रसिद्धि – अंदर से खोखली होती है। सिंहासन प्रतीक है शक्ति, पद और ऐश्वर्य का, लेकिन यदि वह किसी का अपमान कर, झूठ बोलकर, धोखा देकर या आत्मसम्मान को गिरवी रखकर मिला हो, तो वह किसी काम का नहीं।

उदाहरण: अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार करके मंत्री बन जाए, तो वह सिंहासन उसे नाम, पद और पैसा तो देगा, पर आत्मसम्मान छीन लेगा। और एक दिन वही सिंहासन उसे बदनाम करके गिरा भी सकता है।सम्मान बनाम सफलता – क्या अधिक ज़रूरी है?आज के प्रतिस्पर्धी युग में लोग सिर्फ सफलता के पीछे भागते हैं, चाहे उसके लिए उन्हें कितनी भी समझौते क्यों न करने पड़ें। लेकिन एक सच्चा और दीर्घकालिक विजेता वही होता है जो सफलता को सम्मान और नैतिकता के साथ प्राप्त करता है।

1. ईमानदारी से जिएं – भले ही राह कठिन हो, लेकिन आत्मसम्मान को न बेचें।

2. छोटे कार्यों को भी गरिमा से करें – इज़्ज़त से किया गया छोटा काम भी बड़ा प्रभाव छोड़ता है।

3. अपमान सहकर लाभ उठाना बंद करें – जो रिश्ता या काम आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाए, उससे दूर हो जाएँ।

4. बच्चों को भी यही सिखाएँ – कि इज़्ज़त पैसों से नहीं, कर्मों और सोच से मिलती है।

निष्कर्ष:इस दोहे का सार यही है कि “इज़्ज़त और आत्मसम्मान सबसे बड़ी दौलत हैं।” अगर कोई चीज़ इन्हें छीनने की कीमत पर मिल रही है, तो वह त्याग देना ही समझदारी है।धूल में भी इज़्ज़त हो, तो वह माथे का तिलक बन जाती है; लेकिन अपमान में मिला सिंहासन भी कांटों से भरा होता है।

इज़्ज़त का महत्व | आत्मसम्मान और सफलता | सम्मान से जीवन | जीवन में इज़्ज़त क्यों ज़रूरी है | ज़िल्लत से मिली सफलता | हिंदी प्रेरणादायक लेख | आत्मसम्मान पर हिंदी विचार

#इज़्ज़त_का_महत्व#आत्मसम्मान_सबसे_बड़ा_है#सम्मान_से_जीवन#प्रेरणादायक_विचार#हिंदी_मोटिवेशन#ज़िंदगी_के_सच्चे_क़ीमती_सबक#इज़्ज़त_और_सफलता#हिंदी_शायरी_का_संदेश#जीवन_का_सार#हिंदी_विचार#इंसानियत_और_सम्मान#सम्मान_भरा_जीवन#हिंदी_अनमोल_विचार#हिंदी_ब्लॉग#हिंदी_वीडियो_वायरल#शायरी_से_सीख#हिंदी_प्रेरणा#मूल्यवान_विचार#समझदारी_भरे_शब्द#हिंदी_ज्ञान#India, #UttarPradesh, #Bihar

Published by

Unknown's avatar

Rajeev Verma

Thanks For watching. Note:- ALL THE IMAGES/PICTURES SHOWN IN THE VIDEO BELONGS TO ME. I AM THE OWNER OF ANY PICTURES SHOWED IN THE VIDEO ! DISCLAIMER: This Channel DOES NOT Promote or encourage Any illegal activities , neither any services of any child is taken in this video making, all contents provided by this Channel is meant for Sharing Knowledge and awareness for health only . Rajeev Verma #HealthyFeasting. I Loves to post videos on Preventive Health Maintenance Food Recipes. Subscribe my YouTube Channel NOW. http://www.youtube.com/c/HealthyFeasting

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.