राजीव वर्मा स्वरचित एवं प्रकाशित 24 – अप्रैल- 2025
सुबह जगने के बाद अक्सर ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) कुछ बढ़ा हुआ होता है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण हमारा सर्कैडियन रिदम (दैनिक जैविक घड़ी) और सुबह के हार्मोनल बदलाव हैं:
1. सर्कैडियन रिदमहमारा शरीर 24 घंटे में हार्मोन, तापमान, रक्तचाप आदि को नियंत्रित करने के लिए एक आंतरिक घड़ी (सर्कैडियन रिदम) का पालन करता है। सुबह के समय (लगभग 6–10 बजे के बीच) इस घड़ी के अनुरूप रक्तचाप में स्वाभाविक “मॉर्निंग सर्ज” आता है, यानी 10–20% तक का अस्थायी उछाल।
2. कॉर्टिसॉल और एड्रेनालिन का स्तरजागने पर कोर्टिसॉल (तनाव हॉर्मोन) और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है, जो हृदय की धड़कन को तेज़ करते हैं और रक्तचाप को ऊपर ले जाते हैं ताकि शरीर जल्दी से सक्रिय हो सके।
3. शारीरिक गतिविधि का आरंभसुबह उठने के बाद हम शारीरिक रूप से सक्रिय होते हैं—खान-पान, क्लेश, योग-व्यायाम—जिससे हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और रक्तचाप स्वाभाविक रूप से थोड़ा बढ़ जाता है।
4. रक्तचाप का नैदानिक महत्त्वअगर किसी को हाई ब्लडप्रेशर (हाइपरटेंशन) की समस्या है, तो सुबह के ये ऊँचे मान खास तौर पर ध्यान देने योग्य हैं क्योंकि इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।—क्या करना चाहिए?
नियमित मॉनिटरिंगसुबह जगने के 30 मिनट बाद और शाम को सोने से पहले ब्लडप्रेशर चेक करें, ताकि ट्रेंड समझ में आए।दवा निगेशनयदि डॉक्टर ने ब्लडप्रेशर की दवाएँ सुबह लेने के लिए दी हैं, तो समय पर लें। कभी-कभी डॉक्टर सुबह की “सर्ज” को कंट्रोल करने के लिए दवा का टाइम बदल सकते हैं।
जीवनशैली सुधारहल्की एक्सरसाइज, स्वस्थ आहार, पर्याप्त नींद, और तनाव प्रबंधन से सुबह के ब्लडप्रेशर सर्ज को कम किया जा सकता है।
उठने पर प्राकृतिक तौर पर ब्लडप्रेशर थोड़ी वृद्धि दिखाता है, इसे “मॉर्निंग सर्ज” कहते हैं। यदि यह सामान्य सीमा (सिस्टोलिक < 120 mmHg, डायस्टोलिक < 80 mmHg) से अधिक हो, तो नियमित निगरानी और चिकित्सीय सलाह आवश्यक है।