राजीव वर्मा स्वरचित एवं प्रकाशित 27-मार्च – 2025
तो करो हमारे इश्क़ में रंगने की,
हम बहके हुए बादलों से फागुन छीन लायेंगे।
तेरे नाम की खुशबू से साँसें महक जाएँगी,
तेरे इशारों पे हम मौसम भी झुका लायेंगे।
चुप थी हवाएँ अब तक,
मगर आज बोलेगी,
तेरी बाहों की छाँव में धूप भी खोलेगी।
चाँदनी भी झूमकर गीत कोई सुनाएगी,
तेरी हँसी से सजी रात महफ़िल सजाएगी।
तेरी नजरों के जादू में रंग जाएगा जहां,
फूल भी खिलेंगे,
नाचेगी हर एक फ़िज़ा।
बस तू इक बार कह दे,
मुझे अपना बना,
हम क़ायनात से तेरा हर रंग उठा लायेंगे।
सावन से मांग लेंगे तेरे लिए बारिशें,
बहारों से चुरा लेंगे तेरे वास्ते ख़ुशबुएँ।
जो चाहो, वो तक़दीर में लिखवा देंगे,
तेरे इश्क़ में हम खुदा से भी भिड़ जायेंगे।
आरज़ू तो करो हमारे इश्क़ में रंगने की,
हम बहके हुए बादलों से फागुन छीन लायेंगे…!!