Rajeev Verma
संबंध की डोरी नाजुक,
पर अटल विश्वास का नाम,
शब्दों से परे,
जहां मौन का होता आयाम।
रिक्तता में जो साथ दे,
वही सच्चा संबंध,
शून्यता में थामे हाथ,
बने जीवन का प्रबंध।
नहीं दिखावे की चमक,
न स्वार्थ का हो बंधन,
जहां सादगी में बसी हो,
स्नेह की एक सिहरन।
जो न बोले फिर भी समझे,
दिल की हर पुकार,
ऐसे संबंधों से ही सजे,
जीवन का हर त्यौहार।
खुशियों में साथ हर कोई,
पर दुखों में जो खड़ा,
वही होता है सच्चा रिश्ता,
जो कभी न टूटे पड़ा।
शून्यता की गहराई में,
जो बनता सहारा,
संबंध वो अमूल्य है,
जो कभी न हो दोबारा।
तो संभालो उन रिश्तों को,
जो दिल से जुड़े हैं,
जो न शब्दों से,
पर भावनाओं से जुड़े हैं।
क्योंकि संबंध वही सच्चे,
जो निभाए हर दौर,
शून्यता में जो चमके,
बनकर जीवन का सूरज!
संबंध वो नहीं जो केवल,
सुख की राह दिखाए,
संबंध वो जो दुख में भी,
संग खड़ा रह जाए।
जो आँधियों में भी थाम ले,
डगमग कदम तुम्हारे,
जो साथ चले हर मोड़ पर,
चाहे राहें हों दुश्वारे।
संबंध वो जहां अपेक्षा,
न हो कोई मोल-भाव,
संबंध वो जहां हो बस,
समर्पण और लगाव।
जहां शब्दों से परे बसे,
आंखों का संवाद,
जो बिना कहे समझ ले,
हर दिल की फरियाद।
शून्यता में जो उगाए,
उम्मीदों के फूल,
जो अंधेरों में भी जलाए,
विश्वास का दिए का मूल।
जो टूटे मन को जोड़ दे,
और दे नई उड़ान,
ऐसा ही संबंध बने,
जीवन का वरदान।
यह धागा न कभी टूटे,
न बंधे किसी शर्त से,
यह रिश्ता न छूटे,
जीवन के किसी मर्त से।
संबंध वो जो बने सहारा,
जब सब कुछ छूट जाए,
जो रिक्तता में भी साथ दे,
और हर दर्द मिटाए।
तो सहेज लो वो संबंध,
जो दिल से जुड़े हैं,
जो शून्यता में भी,
उम्मीद बन खड़े हैं।
क्योंकि जीवन का असली सार,
उन्हीं से सजता है,
संबंध जो शून्य में भी,
अर्थ नया रचता है।
…….. राजीव वर्मा