राजीव वर्मा द्वारा रचित एवं प्रकाशित, 6 -फरवरी- 2025
चलो चलें इन वादियों में,
जहाँ ‘वाला’ गूंजे सदियों में।
डोईवाला से आमवाला तक,
हर जगह है कुदरत की झलक।
अधोईवाला जहाँ बहारें आयें,
अंबीवाला में आम लहरायें।
अनारवाला में दाने चमकते हैं,
अथूरवाला में बादल बरसते हैं।
बादामवाला की मिठास निराली,
बड़ोनवाला में नदियाँ प्याली।
बालावाला का रास्ता सुहाना,
बंजारावाला का नज़ारा मस्ताना।
बंशीवाला बांसुरी बजाए,
बरोटीवाला चाँदनी लुटाए।
भारतवाला की कहानियाँ पुरानी,
भाऊवाला की हवा दीवानी।
भीमवाला की गूँज निराली,
भोजवाला की मिट्टी काली।
ब्राह्मणवाला में गूंजे वेद,
चिड़रवाला में बहती खेप।
छोटूवाला की गली सुनसान,
डंडा खुदानेवाला का गाँव महान।
डंडा नूरीवाला का कोहरा छाये,
डलानवाला में दिल बस जाए।
धामावाला में खुशबू महके,
फंदोवाला में हँसी बहके।
गजियावाला का मौसम प्यारा,
गुमानीवाला में जीवन न्यारा।
हर्रावाला की गलियाँ देखो,
जैंतनवाला की नदियाँ लेखो।
जामनीवाला में पर्वत प्यारा,
जोगीवाला में संन्यास धारा।
कालूवाला में गीत पुराना,
केदारवाला में नाम निराला।
केसरवाला में रंग सुनहरा,
किद्दूवाला में प्यार गहरा।
लच्छीवाला की सुबह सुहानी,
लखनवाला की गाथा ज्ञानी।
मक्कावाला का ठंडा पानी,
मंडुवाला की फसलें रानी।
महुवाला की शांति निराली,
मियांवाला की राहें खाली।
मोहब्बेवाला का प्यार गहरा,
मोथरोवाला का गाँव सुनहरा।
नागल बड़ोवाला की माटी शुद्ध,
नवाबवाला की शान अद्भुत।
नींबूवाला में रस की धारा,
पश्मीवाला का नज़ारा प्यारा।
पौड़वाला में सपने पलते,
फंदुवाला के खेत मचलते।
पिठ्ठूवाला में सूरज निकले,
प्रेमनगर-डोईवाला में दीप जलें।
रायवाला में शांति बहती,
राजावाला में कथा रहती।
रामसवाला की छाया गहरी,
सभावाला में प्रार्थना लहरी।
सलावाला के वृक्ष ऊँचे,
सुंदरवाला के दृश्य अनूठे।
टैलीवाला की हरियाली,
टुन्नवाला की रौशनी निराली।
उड़ीवाला में हवाएँ नाचे,
वीरगिरवाला में वीर सजे।
यात्रा करो इस प्यारी धरा पर,
उत्तराखंड के दिल को नमन कर!