राजीव वर्मा स्वरचित एवं प्रकाशित – 29 जनवरी -2025
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
जो नहीं होता वो भी दिखा देते हैं लोग,
आईनों में ख़्वाब सजा देते हैं लोग !!
चुप रहो तो तन्हाई का इल्ज़ाम देते हैं लोग,
बोल दो तो चर्चा बना देते हैं लोग !!
न जाने क्या-क्या उम्मीद लगा लेते हैं लोग,
रिश्तों को बाज़ार बना देते हैं लोग !!
सच कहो तो दुश्मन समझ बैठते हैं लोग,
झूठ को सौ बार सजा देते हैं लोग !!
ग़म मिले तो कहते हैं लोग किस्मत थी ये,
ख़ुशी में क़िस्मत का लिखा देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
अब किसी चेहरे पे ऐतबार क्या करें,
हमें हर सूरत नया दिखा देते हैं लोग !!
जो नहीं होता वो भी दिखा देते हैं लोग,
ख़्वाब शीशों में झूठ सजा देते हैं लोग !!
आईनों को सच बोलने की मिली सज़ा,
धूल का पर्दा उन पर चढ़ा देते हैं लोग !!
न जाने क्या-क्या उम्मीद लगा लेते हैं,
साथ चलकर भी दूरी बना देते हैं लोग !!
दिल का सौदे भी करने लगे इस शहर में,
दोस्ती का चोला पहना देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
हमने चाहा था मोहब्बत से बात हो,
बेवजह हर जख़्म हरा देते हैं लोग !!
अपने मतलब से बदलते हैं हर अक्स,
परछाइयों को भी रंग चढ़ा देते हैं लोग !!
जो नहीं होता, वो भी दिखा देते हैं लोग,
बात छोटी हो तो उसे बढ़ा देते हैं लोग !!
ख़्वाब आंखों में किसी के सजा कर यूं,
राह में काँटे बिछा देते हैं लोग !!
न जाने क्या-क्या उम्मीद लगा लेते हैं,
हर अपने को भी पराया बना देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
जो हक़ीक़त थी उसे अफ़साना कहकर,
सच के हर लफ्ज़ को झुठला देते हैं लोग !!
हमने चाहा था सुकून की छाँव मिले,
पर अंधेरों में ही छोड़ जाते हैं लोग !!
दिल की बातें समझे बिना ही अक्सर,
बेवजह फ़ासले बढ़ा देते हैं लोग !!
जो नहीं होता, वो भी दिखा देते हैं लोग,
हर हक़ीक़त को अफ़साना बना देते हैं लोग !!
आईनों में भी मिलती नहीं अब सच्चाई,
चेहरों पर नक़ाब चढ़ा देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
न जाने क्या-क्या उम्मीद लगा लेते हैं,
बेरुख़ी को भी चाहत बना देते हैं लोग !!
जो लफ्ज़ बोले नहीं, वो सुना देते हैं लोग,
ख़ामोशी को भी शोर बना देते हैं लोग !!
रौशनी चाहें तो जला देते हैं अपने ही घर,
चिराग़ों को भी आंधी बना देते हैं लोग !!
हमने चाहा था सच की रौशनी में रहें,
पर साये तक से हमें डरा देते हैं लोग !!
जो नहीं होता, वो भी दिखा देते हैं लोग,
ज़ख़्म ताज़ा हो तो हँसा देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
हमने चाहा था सहारा मिलेगा कभी,
डूबते देखा तो किनारा देते हैं लोग !!
न जाने क्या-क्या उम्मीद लगा लेते हैं,
बेबसी में भी इल्ज़ाम लगा देते हैं लोग !!
हम जो टूटे तो आवाज़ तक ना हुई,
अपनी बेरुख़ी को दुआ देते हैं लोग !!
दिल के हालात कोई समझता नहीं,
और फिर भी तसल्ली दिला देते हैं लोग !!
आँख भीगे तो कहते हैं मौसम बुरा,
अपनी बातों से बारिश बना देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
इक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं लोग,
जो नहीं होता, वो भी दिखा देते हैं लोग !!
सच की राहों पे चलना हुआ है मुश्किल,
झूठ को हर रोज़ सजा देते हैं लोग !!
दिल की बातें किताबों में बंद रह गईं,
बेवजह अफ़साने बना देते हैं लोग !!
अपनों के बीच भी तनहा सा लगता है,
हर अपने को अजनबी बना देते हैं लोग !!
हमने चाहा था कोई दर्द समझे मेरा,
ज़ख़्म को फिर से हरा देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
आईनों में भी अब सच्चाई नहीं मिलती,
हर अक्स को नया रंग चढ़ा देते हैं लोग !!
इक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं लोग,
जो नहीं होता, वो भी दिखा देते हैं लोग !!
बात होती है मोहब्बत की महफ़िलों में,
पर दिलों में दिवारें उठा लेते हैं लोग !!
हमने देखा है सच बोलने की क़ीमत,
अपनों को ही बेगाना बना देते हैं लोग !!
न जाने क्या चाहत की हदें होती हैं,
प्यार को भी सौदा बना देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
हमने चाहा था दर्द कोई बाँट ले,
ज़ख़्म पर हंसकर नमक लगा देते हैं लोग !!
आईनों से भी अब डर सा लगता है,
हर अक्स को नया रूप दे देते हैं लोग !!
इक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं लोग,
जो नहीं होता, वो भी दिखा देते हैं लोग !!
सच कहो तो तमाशा बना देते हैं,
झूठ को हर महफ़िल में सजा देते हैं लोग !!
अपनी आंखों के आँसू छुपा कर यहां,
दूसरों के ग़मों पर हँसा देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !
हमने चाहा था अपनापन मिलेगा कभी,
पर हर रिश्ते को सौदा बना देते हैं लोग !!
दिल के शीशे में दरारें न थीं पहले,
बेवफ़ाई की लहरें उठा देते हैं लोग !!
कभी काँटों को गुलाब बना देते हैं,
कभी फूलों को भी ज़हर चखा देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं,
हर अक्स को नया रंग चढ़ा देते हैं लोग !!
अब किसी आईने पे भरोसा नहीं !!