✨ कविता ✨ चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

राजीव वर्मा, स्वरचित एवं प्रकाशित 28-जनवरी-2025

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

पर हर गहराई में दर्द का मंज़र मिला।
चमकते हुए मोती हाथों में आए,
मगर इन आंखों को न तेरा ही हुनर मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

मुझे सब-कुछ मिला, पर तू न मिला।
खुशियों का कारवां सजा हर राह पर,
चाँदनी सी रातें थीं हर चाह पर।
मगर ये दिल तेरा इंतज़ार करता रहा,
हर सुबह मिली, पर तेरा सवेरा न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तेरे बिना बहारों ने भी रुलाया,
मौसम ने अपने रंग बदलकर दिखाया।
फूल खिले, मगर खुशबू अधूरी थी,
हर ग़ज़ल में तेरा नाम अधूरा लिखा पाया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब खामोशी से बातें करना सीखा है,
तेरे बिना ज़िंदगी को जीना सीखा है।
मिलते हैं सपने, पर अधूरे हर बार,
क्योंकि तकदीर से बस तेरा नाम छूटा है।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला


मगर उस समुंदर में भी तेरा किनारा न मिला।
तेरी आरज़ू में खुद को भुला बैठे,
चाहत के हर आईने को सजा बैठे।
सूरज की हर किरण ने तेरा नाम पुकारा,
पर वो शाम आई, जब हम ही खुद को मिटा बैठे।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

दिल में थे अरमान सितारों को छूने के,
पर तकदीर ने आसमान से जुदा कर दिया।
तेरे ख़यालों में बसा था जो जहां हमारा,
उस जहां को भी अजनबी बना दिया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तुझसे दूर होकर भी तेरा एहसास पाया,
हर साज़ पर तेरा नाम गुनगुनाया।
वो हवाएं भी अब सवाल करती हैं,
कि तेरा दर्द कैसे हर पल निभाया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

चाहत की तस्वीर अधूरी रह गई,
ख्वाबों की तकदीर अधूरी रह गई।
समुंदर मिला, उसकी गहराई भी मिली,
पर उस गहराई में तेरी तस्वीर अधूरी रह गई।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तू जहां है, वहां चांद भी रोशन होगा,
तेरे कदमों के नीचे हर गुलशन होगा।
मगर मेरे सफर में सिर्फ धुंध ही है,
तेरे बिना हर मंज़र बस एक उलझन होगा।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब लिखता हूं ग़ज़ल, मगर बिना रूह के,
तेरी कमी जैसे साज बिना सुर के।
चाहतें समुंदर की थीं, वो भी मिल गया,
पर उसकी लहरों में तेरा नाम ही खो गया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तेरे बिना हर मोड़ सूना-सूना लगा,
भीड़ में भी दिल को अकेला लगा।
चमकती हुई इन आंखों ने देखा जहां,
वहां भी तेरा चेहरा धुंधला-धुंधला लगा।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

साँसें चल रही हैं, पर जीने का नाम नहीं,
खुशियां तो मिलीं, मगर उनका अंजाम नहीं।
हर रात तेरे ख्वाब में गुम हो जाती है,
सुबह होती है, पर तेरा कोई पैगाम नहीं।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

फिजाओं से जब तेरी बातें की,
उन हवाओं में भी तेरा सुरूर था।
दिल ने हर धड़कन से तुझको पुकारा,
पर किस्मत का हमसे एक और दूर था।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

चाहत ने हमें तोड़कर बना दिया,
तेरे इश्क ने दिल को सजा दिया।
हर जख्म हँसते हुए सह लिया हमने,
मगर तेरा नाम हर आंसू में बसा दिया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब आसमान से शिकवा करना छोड़ दिया,
हर टूटते तारे से मन्नत माँगना छोड़ दिया।
तेरा इंतजार मेरी आदत बन चुका है,
खुदा से तेरा सवाल करना छोड़ दिया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

ये जिंदगी भी अब एक फसाना लगती है,
तेरे बिना हर खुशी बेगाना लगती है।
मगर उस समुंदर में तेरा ठिकाना न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला,
मगर उस समुंदर में तेरा ठिकाना न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

हर खुशी का सामान मुझे बेखबर मिला।
ख्वाब थे आसमान छूने के मेरे,
पर दिल को तन्हाई का सफर मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

मुझे सब-कुछ मिला, पर तू न मिला,
हर राह पर उजाला था, पर तू न मिला।
चमकती रौशनी में भी अंधेरा रहा,
तेरे बिना हर मंज़र अधूरा रहा।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

खुशबू थी बहारों की, पर एहसास नहीं,
जिंदगी थी करीब, पर तू पास नहीं।
हर मुस्कान में दर्द का साया मिला,
तेरे बिना हर पल मुझे पराया मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तेरी तलाश में भटकते रहे हम,
हर कदम पर खोते रहे हम।
समुंदर की लहरें भी पुकारती रहीं,
पर उस आवाज़ में तेरा नाम न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब वक्त से गिला नहीं, शिकवा नहीं,
जिंदगी से कोई अरमान बचा नहीं।
चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला,
मगर उस समुंदर में तेरा किनारा न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

हर कश्ती में मेरा ही मुकद्दर मिला।
बहाव संग बहा, पर किनारा न पाया,
तेरे बिना हर मंज़र बंजारा मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

मुझे सब-कुछ मिला, पर तू न मिला,
हर चाहत का जहां था, पर तू न मिला।
खुशियों की बारातें भी रास्तों में थीं,
मगर इस दिल को सुकून का जरिया न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

लहरों की बातों में तेरा जिक्र हुआ,
हवाओं की सरगोशियों में तेरा जादू था।
हर तरफ तेरी ही मौजूदगी का गुमान था,
मगर मेरे हिस्से में खाली एक गुमसुम खामोशी का मुकाम था।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

चमकते हुए मोती हाथों से फिसल गए,
सपने मेरे थे, मगर पूरे अधूरे निकल गए।
जिन गहराइयों में खुद को ढूंढा मैंने,
वहीं दर्द के खज़ाने छुपे हुए निकल गए।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब चल पड़ा हूं बेनाम रास्तों पर,
जिंदगी कट रही है ठहरे हुए लम्हों पर।
चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला,
मगर उस समुंदर में तेरा किनारा न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

गहराई मिली, पर सुकून न मिला।
लहरों की आवाज़ें भी तन्हा लगीं,
हर मंजर में दर्द का सफर मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

ख्वाबों के जहाज भी बहकते रहे,
हर कश्ती के पत्ते सिमटते रहे।
दूर तक था रोशनी का कारवां,
पर अंधेरों में तेरे निशां न मिले।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

मुझे सब-कुछ मिला, पर तू न मिला,
हर जीत अधूरी थी, क्योंकि तू न मिला।
मुकद्दर ने हर बार हाथ थामा मेरा,
मगर तेरी कमी का एहसास न छूटा।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

हर गुलशन से बहारों को चुरा लाया,
पर तेरी खुशबू कहीं न पाया।
सूरज की हर किरण तुझे पुकारती रही,
मगर उसकी रोशनी में तेरा सवेरा न आया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तेरे बिना हर ग़ज़ल अधूरी लगी,
हर नगमा जैसे खामोशी में सिमटी लगी।
तस्वीरों में रंग भरे भी सही,
मगर तेरी मुस्कान कभी कहीं न दिखी।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब मौसम बदलते हैं, मगर एहसास नहीं,
तेरे बिना जिंदगी का कोई वजूद नहीं।
चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला,
मगर उस समुंदर में तेरा किनारा न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

रास्तों पर हर कदम तेरा नाम लिखा,
मगर उन राहों ने मुझे तन्हा ही रखा।
तेरी तलाश में हर सितारा गिराया मैंने,
मगर आसमान ने भी तेरा पता न दिया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

दिल की किताबों में सिर्फ तेरा नाम है,
आंसुओं की कहानी में बस तेरा पैगाम है।
जिंदगी तो मिली, पर उसका मतलब खो गया,
क्योंकि वो जो चाहिए था, वो कभी न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब समुंदर की गहराइयों में डूब गया हूं,
तेरे बिना अपनी पहचान भूल गया हूं।
चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला,
मगर उस समुंदर में भी तेरा किनारा न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

हर लहर में एक नया मंजर मिला।
चमकती थीं गहराइयां उम्मीदों की,
मगर उन गहराइयों में दर्द का सफर मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

मुझे सब-कुछ मिला, पर तू न मिला,
हर राह का मुकाम था, पर तू न मिला।
खुशियों के दीप जले हर मोड़ पर,
पर उन दीयों में तेरा उजाला न मिला।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

सितारों ने राहें भी दिखाईं मुझे,
मगर तेरी तस्वीर कहीं न पाई मैंने।
हर झोंके में तेरी खुशबू ढूंढता रहा,
पर हवाओं से सिर्फ खामोशी पाई मैंने।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

फूल खिले हर बगिया में, मगर रंग फीके थे,
तेरे बिना सारे मौसम अधूरे ही जी के थे।
चाँद भी हर रात पास आ बैठा,
मगर उसकी रोशनी में तेरा चेहरा न दिखा।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

हर आंसू से कहानी बनती गई,
तेरी याद से ये ज़िंदगी सजती गई।
ख्वाबों के काफिले तो मिले हर तरफ,
पर उनमें तेरे साथ की तस्वीर अधूरी रही।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

चाहत का दरिया बहा, पर किनारा खो गया,
हर चाहत ने मुझे खुद से ही जुदा कर दिया।
समुंदर की गहराइयों ने आवाज़ दी,
मगर उसमें भी तेरा नाम खो गया।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

अब शब्दों में तुझसे बातें करता हूं,
तेरी यादों में अपनी रातें क़तरा-क़तरा जीता हूं।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

मगर उस समुंदर में भी तेरा किनारा न मिला।

तेरे करीब आने का हर लम्हा सुलगता है,
हर सांस में तेरा नाम धड़कता है।
चाहत की लहरें जब मुझसे टकराती हैं,
तेरे बदन की खुशबू मदहोश कर जाती है।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

हवा में तेरी गर्म आहट का एहसास है,
तेरी छुअन में जैसे आग का आकाश है।
तू जब करीब होता है, बदन कांप उठता है,
जज्बातों का समंदर दिल से लहर बनकर फूटता है।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तेरी उंगलियों का सफर मेरी त्वचा पर,
जैसे तपते रेगिस्तान पर बारिश का असर।
तेरी गर्म साँसें जब मेरे गालों को छूती हैं,
रग-रग में जैसे बिजली सी दौड़ती है।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

तेरी आँखों का काजल भी कोई जादू सा है,
तेरी मुस्कान में एक खुमार सा है।
तेरे होंठ जब नाम पुकारते हैं मेरा,
जिंदगी का हर एहसास बेहोश सा है।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

मुझे रोक न सकोगे तुम, अब पास आना है,
तेरे लबों से अपने हर राज़ को बताना है।
चाहतें दरिया की थीं, पर तू समुंदर है,
इस समुंदर की गहराई में डूब जाना है।

चाहतें दरिया की थीं, तो समुंदर मिला

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Rajeev Verma

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