राजीव वर्मा, देहरादून
गुजार ही लोगे जिंदगी,
मुझे तो यह फ़न भी नहीं आता,
तुम्हारे बिन जीने का सलीका,
मुझे जानना भी नहीं आता।
हर साँस में बस तुम्हारा नाम लिया है,
तुम्हारे बिन कोई लम्हा काटना भी नहीं आता।
तुम चले गए, पर ख्वाब अभी भी तेरा है,
दिल से तुम्हारी यादों का रिश्ता गहरा है।
मुस्कान ओढ़ कर जीना तुमने सीख लिया,
मुझे तो दर्द छुपाने का हुनर भी नहीं आता।
कहते हैं वक्त हर जख्म को भर देता है,
पर इस दिल का सच कोई क्या समझता है।
तुम्हें भुलाने की कोशिश हर दिन करता हूँ,
मगर खुद को धोखा देना मुझसे होता नहीं जाता।
गुजार ही लोगे जिंदगी, ये हक़ीक़त सही है,
पर मेरी चाहत का दीया अब भी वही है।
तुम्हारी एक झलक से जो रोशन हुआ था,
वो उजाला अब अंधेरों में ढलता नहीं जाता।