राजीव वर्मा, स्वरचित एवं प्रकाशित 26-सितंबर-2024
जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य,
आप और हम कभी नहीं समझ पायेंगे।
बन चुके हैं दुनियां का हिस्सा,
गिरते- सम्भलते, संघर्ष करते,
कुछ पा गये मंजिल, तो
कुछ न जाने कहां खो गए हैं …!
सच है लेकिन, कि
हमें हकीकतों ने पाला है ।
पांचवीं तक स्लेट की बत्ती को
जीभ से चाटकर कैल्शियम की
कमी पूरी करना हमारी आदत थी..
पढ़ाई के तनाव हमने …
पेन्सिल का पिछला हिस्सा
चबाकर मिटाया है …!
पुस्तक के बीच मोरपंख रखकर
हम होशियार हो जाएंगे,
ऐसा दृढ विश्वास हमने जगाया है।
किताबों पर जिल्द चढ़ाना,
रखकर नये थैले में उन्हें,
उत्सव था हमारा …!
कोई फ़िक्र नहीं थी माता – पिता को हमारी,
सालों साल चरण उनके
न पडते थे स्कूल में,
न ही मालूम होता था,
पढ़ रहे हैं किस कक्षा में!
एक दोस्त को साईकिल के डंडे पर,
दूसरे को कैरियर पर बिठा कर,
न जाने हमने कितने रास्ते नापें हैं।
याद नहीं स्कूल में पिटते और मुर्गा बनते,
ईगो हमें कभी परेशान नहीं करता था,
सहज सामान्य प्रक्रिया थी पिटना पिटाना,
पिटने वाला, पीटने वाला दोनों खुश रहते थे,
पिटने वाला कि हम कम पिटे
पीटने वाला कि चलो हाथ साफ़ हुआ …!
अपने माता – पिता को कभी नहीं बता पाए,
हम उन्हें कितना प्यार करते हैं,
क्योंकि
हमें “आई लव यू” कहना आता ही नहीं था …!
पलटो एक बार फिर,
बचपन के पन्नो को,
दादाजी गाते थे …
मेरा नाम करेगा रोशन
जग में मेरा राज दुलारा।
हमारे ज़माने में हमने गाया …
पापा कहते है बड़ा नाम करेगा
अब हमारे बच्चे गा रहे हैं …
बापू सेहत के लिए …
तू तो हानिकारक है।
सही में हम,
कहाँ से कहाँ आ गए …!
इसलिए …
पहले भटूरे को फुलाने के लिये ..
उसमें ईनो डालिये..
फिर भटूरे से फूले पेट को …
पिचकाने के लिये ईनो पीजिये …
एक बार मुड़ कर देखिये …