राजीव वर्मा स्वरचित एवं प्रकाशित 22-सितंबर-2024
स्वर शास्त्र बड़ा विस्तृत है और उसमें स्वर के साथ ही तत्वों का विचार रखना भी आवश्यक होता है, तभी पूर्ण सफलता मिलती है। मनुष्य के शरीर में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश तत्व का अवस्थान माना गया है और इनमें से एक समय में कोई एक तत्व उदय होता रहता है।
स्वर का दूसरा नाम क्या है?
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है, लेकिन ध्वनि की ऊँचाई और नीचाई के आधार पर संगीत में तीन तरह के सप्तक माने गये। साधारण ध्वनि को ‘मध्य’, मध्य से ऊपर की ध्वनि को ‘तार’ और मध्य से नीचे की ध्वनि को ‘मन्द्र’ सप्तक कहा जाता है।
शुद्ध स्वर कितना होता है?
स्वरों के दो प्रकार हैं- शुद्ध स्वर और विकृत स्वर। बारह स्वरों में से सात मुख्य स्वरों को शुद्ध स्वर कहते हैं अर्थात इन स्वरों को एक निश्चित स्थान दिया गया है और वो उस स्थान पर शुद्ध कहलाते हैं।
स्वर का पता कैसे लगाएं?
स्वर को पहचानने की सरल विधियां-
(1) तर्जनी अंगुली छिद्रों के नीचे रखकर श्वास बाहर फेंकिए। ऐसा करने पर आपको किसी एक छिद्र से श्वास का अधिक स्पर्श होगा। जिस तरफ के छिद्र से श्वास निकले, बस वही स्वर चल रहा है।
(2) एक छिद्र से अधिक एवं दूसरे छिद्र से कम वेग का श्वास निकलता प्रतीत हो तो यह सुषुम्ना के साथ मुख्य स्वर कहलाएगा।
किस तिथि को कौन-सा स्वर चलना शुभ होता है
सांस के माध्यम को हम योग की भाषा में स्वर कहते हैं। नाक के जिस छिद्र से सांस ली जाती है उसी छिद्र की दिशा के अनुसार ही दाएं स्वर चलना या बाएं स्वर चलना कहा जाता है। जिस प्रकार दिन में लग्न का परिवर्तन होता है, उसी प्रकार स्वर का परिवर्तन भी उसी समय में होता है।
पानी पीते समय कौन सा स्वर चलना चाहिए?
स्नान, भोजन, शौच आदि के वक्त दाहिना स्वर रखें। पानी, चाय, काफी आदि पेय पदार्थ पीने, पेशाब करने, अच्छे काम करने आदि में बांया स्वर होना चाहिए। जब शरीर अत्यधिक गर्मी महसूस करे तब दाहिनी करवट लेट लें और बांया स्वर शुरू कर दें।
अमावस्या को कौन सा स्वर चलना चाहिए?
कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावस्या- इन 9 दिनों में सूर्योदय के समय पहले दाहिनी नासिका से तथा चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, दशमी, एकादशी, द्वादशी- इन 6 दिनों में सूर्य के उदयकाल में पहले बाईं नासिका से श्वास आरंभ होता है और ढाई घड़ी के बाद दूसरी नासिका से चलता है।
उत्तरायण में कौन सा स्वर चलना चाहिए?
दक्षिणायन शुरू होने के दिन प्रातःकाल जगते ही यदि चन्द्र स्वर हो तो पूरे छह माह अच्छे गुजरते हैं। इसी प्रकार उत्तरायण शुरू होने के दिन प्रातः जगते ही सूर्य स्वर हो तो पूरे छह माह बढ़िया गुजरते हैं।
चंद्र स्वर क्या होते हैं?
नाक के दाहिने छिद्र को दाहिना स्वर या सूर्य स्वर अथवा पिंगला नाड़ी कहा जाता है और बायें छिद्र को बायां स्वर या चंद्र स्वर अथवा इडा नाड़ी कहा जाता है। इन्हें कंट्रोल करने से हम अपनी पूरी दिनचर्या, स्वास्थ्य, एनर्जी और दिमाग की क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसे स्वरोदय चिकित्सा से भी जोड़ा गया है।
सोते समय कौन सा नथुना सक्रिय होना चाहिए?
अगर आपकी दाईं नासिका ज़्यादा खुली हुई लगती है, तो आप जिस भी तरफ़ चाहें सो सकते हैं। लेकिन, अगर आपकी बाईं नासिका ज़्यादा खुली हुई लगती है, तो आपको अपनी बाईं तरफ़ सोने की सलाह दी जाती है । उन्होंने कहा कि सुबह उठने पर बिस्तर से बाहर निकलने से पहले अपनी दाईं तरफ़ करवट लें।
दाहिनी नासिका प्रमुख होने पर क्या करना चाहिए?
दूसरे शब्दों में, आप छह की गिनती तक बाएं नथुने से सांस लेंगे, अपनी उंगली से दाएं नथुने को बंद रखेंगे। तीन गिनती तक सांस रोककर रखें। फिर दाएं नथुने को छोड़ें और छह की गिनती तक सांस छोड़ें, अपनी उंगली से बाएं नथुने को बंद करें और छह की गिनती तक दाएं नथुने से सांस लें।
नहाते समय कौन सा स्वर चलना चाहिए?
बाएं नथुने का चलना बायां या चंद्रस्वर, दाएं नथुने का चलना दायां या सूर्य स्वर तथा दोनों के बीच सम स्थिति को संधि स्वर कहा जाता है।
घर से निकलते समय कौन सा स्वर चलना चाहिए?
ज्योतिष के अनुसार यदि किसी यात्रा को शुभ और सफल बनाने के लिए हमेशा घर से निकलते समय स्वर का विशेष ध्यान रखें. यदि आपकी नासिका का दायां स्वर चले तो अपना दायां पैर पहले निकाले और बायां स्वर चल रहा हो तो अपना बायां पैर घर की डेहरी से पहले निकालें.
सुषुम्ना स्वर क्या होते हैं?
स्वर तीन प्रकार के होते हैं -सूर्य, चंद्र और सुषुम्ना स्वर.
स्वरोदय विज्ञान के अनुसार अगर श्वास दाहिने छिद्र से बाहर निकल रही है तो यह सूर्य स्वर होगा। इसके विपरीत यदि श्वास बाएं छिद्र से निकल रही है तो यह चंद्र स्वर होगा एवं यदि जब दोनों छिद्रों से निःश्वास निकलता महसूस करें तो यह सुषुम्ना स्वर कहलाएगा।
पिंगला और इड़ा क्या है?
पिंगला बहिर्मुखी (सक्रिय) सौर नाड़ी है, और शरीर के दाहिने हिस्से और मस्तिष्क के बाएं हिस्से से मेल खाती है। इडा अंतर्मुखी, चंद्र नाड़ी है, और शरीर के बाएं हिस्से और मस्तिष्क के दाहिने हिस्से से मेल खाती है।
नाक का कौन सा स्वर चलना चाहिए?
नाक के दाहिने छिद्र से चलने वाले स्वर को सूर्य स्वर कहते हैं। बाएं छिद्र से चलने वाले स्वर को चंद्र स्वर कहते हैं। योग विद्या के अनुसार इन्हें इडा और पिंगला भी कहते हैं। दोनों छिद्रों से चलने वाले श्वास को सुषुम्ना स्वर कहते हैं।
पिंगला नाड़ी से कौन सा श्वास बाहर आता है?
जिन लोगों की दायीं यानी पिंगला नाड़ी अधिक सक्रिय होती है, वे बहिर्मुखी होते हैं। जैसे ही यह सक्रिय होती है, दायीं नासिका से श्वास-प्रश्वास अधिक होने लगता है।
इड़ा और पिंगला को संतुलित कैसे करें?
नाड़ी शोधन (नाक से सांस लेना) इडा और पिंगला में संतुलन लाने के सबसे शक्तिशाली तरीकों में से एक है। चूंकि आप प्रत्येक नासिका से सांस लेना बदलते हैं, इसलिए यह नाड़ियों में संतुलन की भावना लाता है। और आसन अभ्यास के बाद किया जाने वाला यह आपके द्वारा किए गए किसी भी असंतुलन को बेअसर करने में मदद कर सकता है।
अर्द्ध स्वर क्या होते हैं?
ध्वनिविज्ञान और ध्वनिविज्ञान में, अर्धस्वर , ग्लाइड या अर्धव्यंजन एक ऐसी ध्वनि है जो ध्वन्यात्मक रूप से स्वर ध्वनि के समान होती है लेकिन एक शब्दांश के नाभिक के बजाय शब्दांश सीमा के रूप में कार्य करती है। अंग्रेजी में अर्धस्वरों के उदाहरण क्रमशः yes और west में व्यंजन y और w हैं।
बायीं नासिका श्वास क्या है?
जब प्रेरणा और समाप्ति (एक श्वास चक्र) केवल बाएं नथुने द्वारा पूरा किया जाता है, उस समय के लिए दायां नथुना बंद होता है, इस प्रकार के श्वास अभ्यास को ” चंद्र अनुलोम विलोम ” प्राणायाम कहा जाता है; यह श्वास अभ्यास गर्मी को शीतलन प्रभाव में स्थानांतरित करेगा
दाहिनी नासिका से सांस लेने का क्या मतलब है?
योगिक अभ्यास से पता चलता है, और वैज्ञानिक प्रमाण भी दर्शाते हैं, कि दाएं नथुने से ली गई सांस अपेक्षाकृत उच्चतर सहानुभूति गतिविधि (उत्तेजना की स्थिति) से जुड़ी होती है, जबकि बाएं नथुने से ली गई सांस अपेक्षाकृत अधिक पैरासिम्पेथेटिक गतिविधि (तनाव कम करने वाली स्थिति) से जुड़ी होती है।
बासी मुंह पानी पीने से कौन सी बीमारी ठीक होती है?
सुबह बासी मुंह पानी पीने से हाई बीपी और ब्लड शुगर की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए सुबह उठकर एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। सुबह उठते ही बिना ब्रश पानी का सेवन आपके पाचन तंत्र को मजबूत करता है। यह आदत एसिडिटी, कब्ज, गैस को खत्म करके हेल्दी डाइजेशन बनाए रखने में मदद करती है।