राजीव वर्मा स्वरचित एवं प्रकाशित 22-सितंबर-2024
हाथ में संतान रेखा कौन सी होती है?
हथेली में कनिष्ठिका अंगुली के मूल में बुध पर्वत पर ऊपर की ओर स्थित रेखा को संतान रेखा कहा जाता है. यह रेखा स्पष्ट होनी चाहिए. आपके हाथ में जिनती संतान रेखा होंगी, भविष्य में आपके उतने ही बच्चे होंगे.
कुंडली में पुत्र योग कब बनता है?
यदि पंचम स्थान का अधिपति सप्तम, नवम, ग्यारहवें, लग्नस्थ, द्वितीय में हो तो संतान से संबंधित सुख शुभ फल देता है। द्वितीय स्थान के स्वामी ग्रह पंचम में हो तो संतान सुख उत्तम होकर लक्ष्मीपति बनता है। पंचम स्थान का अधिपति छठे में हो तो दत्तक पुत्र लेने का योग बनता है।
कुंडली में जब संतान प्राप्ति कारक ग्रह बृहस्पति की दशा आती है अथवा कुंडली के पंचम भाव के स्वामी की दशा प्राप्त होती है या उन ग्रहों की दशा प्राप्त होती है, जो पंचम भाव से संबंध बना रहे हों और शुभ ग्रह हों तो जातक को संतान प्राप्ति के योग बन जाते हैं.
कुंडली में पुत्र का घर कौन सा होता है?
* ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कुंडली के पंचम भाव का स्वामी शुक्र के साथ हो तो 30 साल के बाद की उम्र में पुत्र होता है. वहीं पंचमेश और बृहस्पति 1-4-7-10 स्थानों में हो तो 36 वर्ष की आयु में संतान की प्राप्ति होती है.
* पंचम स्थान संतान का होता है। वही विद्या का भी माना जाता है। पंचम स्थान कारक गुरु और पंचम स्थान से पंचम स्थान (नवम स्थान) पुत्र सुख का स्थान होता है। पंचम स्थान गुरु का हो तो हानिकारक होता है, यानी पुत्र में बाधा आती है।
कुंडली में पुत्र योग कैसे चेक करें?
कुंडली में ग्यारवे स्थान में मंगल होने पर पुत्र संतान का योग बनता है। पुत्र सुख प्राप्त होता है। वंश वृद्धि के योग बनते है। कुंडली में लग्न में बृहस्पति होने पर पुत्र संतान का योग बनता है और पुत्र सुख प्राप्त होता है वंश वृद्धि होती है लेकिन कुंडली में बृहस्पति शनि राहु द्वारा किसी भी प्रकार से पीड़ित नहीं होना चाहिए।
कुंडली में पुत्र योग कैसे पता करें?
पुत्र प्राप्ति योग पर इसके प्रभाव का विश्लेषण करते समय, ज्योतिषी जन्म कुंडली के 5वें या 11वें घर में इसके स्थान को देखते हैं । इन घरों में एक मजबूत और अच्छी तरह से स्थित बृहस्पति संतान के लिए आशीर्वाद का संकेत देता है और बच्चे के जन्म के लिए एक सहायक वातावरण का संकेत देता है।
पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा ग्रह मजबूत होना चाहिए?
शनि की इन भावों में स्थिति शल्यक्रिया यानी ऑपरेशन से संतान प्राप्ति की ओर संकेत देती है.
पुत्र कारक ग्रह कौन से हैं?
ज्योतिषियों के अनुसार कुंडली में बृहस्पति संतान के प्रमुख कारक होते हैं। अगर पति-पत्नी दोनों की कुंडली में बृहस्पति शुभ स्थान में बैठे हों तो कंसीव करने और स्वस्थ प्रसव की संभावना अधिक होती है। वहीं अगर कुंडली में गुरु कमजोर हो या पीड़ित हो तो संतान प्राप्त करने में देरी आ सकती है।
ज्योतिष के अनुसार लड़का पैदा कैसे करें?
पुत्र होगा या पुत्री इसका भी निर्णय ग्रहों की स्थिति के आधार पर होता है.” संतान पाने के लिए इन ग्रहों को बनाएं मजबूत: यदि पुत्र संतान चाहते हैं, तो सूर्य गुरु और मंगल को शक्तिशाली बनाया जाना चाहिए, ताकि पुत्र की प्राप्ति हो. अन्य ग्रहों के प्रभाव से कन्या का जन्म होता है.
पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा दिन संबंध बनाना चाहिए?
इसके लिए आपको गरुण पुराण में बताए गए. इन नियमों का पालन करना होगा. पुत्र प्राप्ति के लिए महिला के मासिक धर्म समाप्त होने के 8वें,10वें, 12वें, 14वें और 16 दिन ही संबंध बनाने से पुत्र की प्राप्ति की संभावना रहती है. यह सम दिन माने जाते हैं.
पुत्र होगा या पुत्री कैसे जाने?
कहा जाता है कि अगर मां के बाल प्रेग्नेंसी में घने हो जाएं, तो इसका मतलब है कि लड़का होगा। वहीं अगर बाल पतले हो जाएं और बाल बहुत ज्यादा झड़ने लगे तो समझ लें कि बेटी होने वाली है। प्रेगनेंट महिला का प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ने का मतलब है कि लड़की होगी लेकिन अगर सिर्फ पेट का आकार बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि बेटा होगा।
पुत्र प्राप्ति के लिए पीरियड के कितने दिन बाद संबंध बनाना चाहिए?
गर्भधारण करने के लिए संबंध बनाने का सबसे सही समय ओव्यूलेशन के दौरान होता है। आमतौर पर पीरियड के पहले दिन से 14 से 16 दिनों के बाद संबंध बनाना बेहतर होता है। इस दौरान सेक्स करने से कंसीव करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
लड़का पैदा करने के लिए कौन सा दिन अच्छा होता है?
मूलतः उत्तर: 30 दिन के मासिक चक्र वाले व्यक्ति के लिए लड़का पैदा करने का सही समय क्या है आप केवल तभी गर्भवती हो सकती हैं जब आप ओवुलेशन के आस-पास की छोटी सी अवधि के दौरान सेक्स करें। यह आपके मासिक धर्म से लगभग 14 दिन पहले होता है।
कौन से महीने में पुत्र प्राप्त होता है?
सनातन धर्म के ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशी के व्रत आते हैं, लेकिन सावन के महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करके विधि विधान से पूजा पाठ करने से सुयोग्य पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है.
कौन से पक्ष में लड़का होता है?
* शुक्ल पक्ष में जैसे-जैसे तिथियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे चन्द्रमा की कलाएं बढ़ती हैं। इसी प्रकार ऋतुकाल की रात्रियों का क्रम जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे पुत्र उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती है, यानी छठवीं रात की अपेक्षा आठवीं, आठवीं की अपेक्षा दसवीं, दसवीं की अपेक्षा बारहवीं रात अधिक उपयुक्त होती है।
* “पूर्णिमा” के दिन गर्भाधान के प्रभाव से लड़का पैदा होता है और “अमावस्या” के दिन गर्भाधान के परिणामस्वरूप लड़की पैदा होती है।
कौन से महीने में गर्भ धारण करने से लड़का होता है?
गर्भ में भ्रूण धारण होता है, लड़का या लड़की नही. भ्रूण के लिंग का निर्धारण 16 सप्ताह या 110 दिन के पश्चात मातापिता के क्रोमोसोम एंव माता की गर्भ के दौरान ली एंव पचाइ डाईट के अनुसार होता है.
लड़का पैदा करने के लिए कौन सा फल खाना चाहिए?
कीवी फल में उच्च स्तर का जिंक होता है जो पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा होता है। इससे शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ावा मिलता है और गर्भधारण की संभावना भी बढ़ जाती है।
पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा स्वर चलना चाहिए?
यदि पुत्र चाहते हैं, तो स्त्री को हमेशा पुरुष के बाएं तरफ सोना चाहिए। कुछ देर बाएं करवट लेटने से दायां स्वर और दाहिनी करवट लेटने से बायां स्वर शुरू हो जाता है। ऐसे में दाईं ओर लेटने से पुरुष का दायां स्वर चलने लगेगा और बाईं ओर लेटी हुई स्त्री का बायां स्वर चलने लगेगा। यदि ऐसा संभव हुआ तो तभी मैथुन करना चाहिए।
गर्भ में लड़का हो तो क्या महसूस होता है?
अगर किसी स्त्री के गर्भ में लड़का पल रहा हो तो औरत के पैर ठंडे रहते और बाल झड़ने लगते हैं। इस दौरान महिला का मूड भी हमेशा बदलता रहता है। 4. जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बाईं करवट लेकर सोना पसंद करती हैं तो समझ जाना चाहिए कि आपकी कोख में लड़का है।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से पुत्र प्राप्ति होती है?
इस महीने में कुछ खास उपाय करने से आपका भाग्योदय हो सकता है शिवपुराण के अनुसार शिव जी को हरसिंगार के पुष्प चढ़ाने से धर में सुख-संपत्ति आती है वहीं धतूरे के फूल चढ़ाने से भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं।
पुत्र प्राप्ति के लिए क्या पूजा करें?
दिनमें केवल एक बार ही भोजन करें। ऊं नम: शिवाय का जाप करते हुए दूध, दही, बेलपत्र, गंगाजल और चावल से भगवान का अभिषेक करें। पंचामृत से किया गया अभिषेक भगवान भोलेनाथ को बेहद प्रिय है।
पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा पाठ करना चाहिए?
संतान के लिए गोपाल मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः का जाप करें।
पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा पुराण पढ़ना चाहिए?
गरुण पुराण के अनुसार सम दिन में संबंध बनाने से पुत्र की प्राप्ति होती है.
कौन से महीने में पुत्र प्राप्ति होती है?
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि, पुत्र प्राप्ति के लिए स्त्री के मासिक धर्म समाप्त होने के 8वें, 10वें, 12वें, 14वें और 16वें दिन यानी सम दिनों के संबंध बनाने से पुत्र प्राप्ति की संभावना अधिक रहती है.
कौन से वार को संबंध बनाने से लड़का होता है?
शास्त्रों के अनुसार सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को संतान प्राप्ति के लिए बनाए गए संबंध सबसे ज्यादा शुभ माने जाते हैं।
पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा पेड़ लगाना चाहिए?
घर के आसपास पपीते का पेड़ लगाना शुभ माना जाता है। इससे जल्द संतान की प्राप्ति होती है।
पुत्र प्राप्ति के लिए क्या खाएं?
(1). स्वस्थ आहार: स्वस्थ और संतुलित आहार संतान प्राप्ति में मदद कर सकता है। आपको प्रोटीन, फल, सब्जियाँ, अनाज, हरे पत्ते, और दूध जैसे पोषण से भरपूर आहार लेना चाहिए।
(2). विटामिन और खनिजों की गहराई: ध्यान दें कि आपका आहार विभिन्न विटामिन और खनिजों से भरपूर हो, जैसे कि फॉलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, और विटामिन सी।
नारियल के बीज से पुत्र प्राप्ति कैसे होती है?
नारियल का फूल खाने से संतान की प्रप्ति होती है
नारियल का बीज संतान का रूप माना जाता है। सही विधि से नारियल के बीज के इस्तेमाल से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। नि:संतान दंपति को पुत्र की प्राप्ति होती है।
कौन-कौन सी तिथि को गर्भधारण नहीं करना चाहिए?
गर्भाधान श्राद्धपक्ष, ग्रहणकाल, पूर्णिमा व अमावस्या को नहीं किया जाना चाहिए। जब दंपती के गोचर में चंद्र, पंचमेश व शुक्र अशुभ भावगत हों, तब भी गर्भाधान उत्तम नहीं होता है। रजोदर्शन की 11वीं और 13वीं रात्रि को भी गर्भाधान शुभ नहीं कहा गया है।
महीने में कितनी बार शारीरिक संबंध बनाना चाहिए?
8–10 बार। इससे ज्यादा करेंगे तो ये मजे के बजाय काम में बदल जायेगा जैसे नहाना धोना खाना सोना आदि। महीने में कितनी बार सेक्स रिलेशन बनाना स्वास्थ्यप्रद यानि हेल्दी रहता है। ये आपकी ऊर्जा, एनर्जी पर निर्भर है।
संबंध बनाने के बाद स्त्री क्या चाहती है?
उसे संबंध बनाने के बाद भी पार्टनर के सानिध्य की जरूरत महसूस होती है। आज भी ज्यादातर कपल सेक्शुअल रिलेशन के पहले के सुख पर ध्यान देते हैं, जबकि महिलाओं को इसके बाद पार्टनर के सानिध्य की जरूरत होती है। महिला चाहती है कि सेक्सुअल संबंध के बाद भी पति उसे बाहों में भरे, प्यार करे। इससे उसे पूरी संतुष्टि मिलती है।