जलेबी का आयुर्वेदिक उपयोग

राजीव वर्मा स्वरचित संकलित एवं प्रकाशित 21-अग-2024

जलेबी की खोज ईरान में हुई थी। हालांकि, ईरान में इस मिठाई को जुलाबिया या जुलुबिया नाम से जाना जाता था। जलेबी के इतिहास पर कहा जाता है कि 500 साल पहले तुर्की आक्रमणकारियों की वजह से जलेबी भारत पहुंची और यहां भी इसे खूब पसंद किया गया। जलेबी असल में अरबी मूल का शब्द है।

जलेबी असल में एक अरबी शब्द है और इस मिठाई का असली नाम है जलाबिया. इसके अलावा मध्यकालीन पुस्तक ‘किताब-अल-तबीक़’ में ‘जलाबिया’ नामक मिठाई का उल्लेख है जिसकी शुरुआत पश्चिम एशिया में हुई थी। इसे अंग्रेजी में Rouded Sweet या Funnel Cake कहा जाता है. हालांकि कुछ लोग इसके लिए Sweetmeat या Syrup Filled Ring भी कहते हैं.

भारत में जलेबी को 15वीं शताब्दी में अपनाया गया था, उस समय इसे कुंडालिका के नाम से जाना जाता था। यह व्यंजन तुर्की और फारसी व्यापारियों और कारीगरों के साथ भारतीय तटों तक पहुंचा और जल्द ही उपमहाद्वीप के लोगों ने इसे अपना लिया और इसे जलेबी कहना शुरू कर दिया। इसके बाद यह धीरे-धीरे लोगों की जुबां को पसंद आई और लोगों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया।

इस मिठाई की धूम भारतीय उपमहाद्वीप से आरम्भ होकर पश्चिमी देश स्पेन तक जाती है। इस बीच भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, ईरान के साथ समस्त अरब देेेशों में भी यह जानी-पहचानी है। सामान्य रूप से तो जलेबी सादी ही बनाई व अधिमान की जाती है, पर छेना व खोया जलेबी को भी लोग बड़़े चाव से खाते हैं। जलेबी भारत की राष्ट्रीय मिठाई हैं।

जलेबी सिर्फ मिठाई नहीं आयुर्वेदिक दवाई भी है। ये एक राजशाही पकवान है जिसे दूध दही या रबड़ी से खाया जाता है।

जलेबी का आयुर्वेदिक उपयोग :-
* जलेबी एक भारतीय व्यंजन है जो की जलोदर नामक बीमारी का इलाज में प्रयोग की जाती थी।
* शुगर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए जलेबी को दही से खाते थे।
* खाली पेट दूध जलेबी खाने से वजन और लम्बाई बढ़ाने के लिए किया जाता था।
* माइग्रेन की और सिर दर्द के लिए सूर्योदय से पहले दूध जलेबी खाने को आयुर्वेद में लिखा है।

ग्रह शांति अथवा ईश्वर का भोग  में जलेबी से :-
* आदि गुरु शंकराचार्य  द्वारा लिखित देवी पूजा पद्धति में भगवती को बिरयानी यानी हरिद्रान पुआ जलेबी भोग लगाने के विषय में लिखा है।
* जलेबी माता भगवती को भोग में चढ़ाने की प्रथा है।
* इमरती जो की उडद दाल से बनती है वो शनिदेव के नाम पर हनुमान जी या पीपल वृक्ष या शनि मंदिर में चढ़ाने काले कौवा और कुत्ते को खिलाने से शनि का प्रभाव कम होता है।
* जलेबी कुंडली के आकार की की होती है जिसका संबंध आंतो से है कब्ज का ये रामबाण इलाज है।

जलेबी बनाने की विधि
हमारे प्राचीन ग्रंथ में जलेबी बनाने की विधि संस्कृत भाषा में लिखी है साथ ही जलेबी बनाने की विधि पुराणों में  भी है इसे रस कुंडलिका नाम दिया है। भोज कुतुहल में इसे जल वल्लीका नाम दिया है। गुण्यगुणबोधिनी’ में भी जलेबी बनाने की विधि लिखी है।

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Rajeev Verma

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