राजीव वर्मा, संकलित एवं प्रकाशित 15-जून-2024
महर्षि व्यास जी के अनुसार सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलयुग ये चार युग हैं, जो देवताओ के बारह हज़ार दिव्य वर्षो के बराबर होते हैं। समस्त चतुर्युग एक से ही होते हैं। आरम्भ सत्ययुग से होता है अंत में कलयुग होता है।
किसी भी जन्म में अपनी आज़ादी से किये गये कर्मों के मुताबिक आत्मा अगला शरीर धारण करती है। हिन्दू धर्म के सर्वोच्च ग्रन्थ हैं, जो पूर्णत: अपरिवर्तनीय हैं, अर्थात् किसी भी युग में इनमे कोई बदलाव नही किया जा सकता।
ब्रह्माजी क्रत्युग में जिस प्रकार सृष्टि का आरम्भ करते हैं, वैसे ही कलयुग में उसका उपसंहार करते हैं। सतयुग, द्वापरयुग, कलयुग हर युग में कोई न कोई भगवान जन्म जरूर लेते है ऐसा सभी लोगों का मानना है, लेकिन क्या आप जानते है कि किस युग में इंसान कितने जन्म लेता है। इसलिए आइए जानें चारों युगों के बारे में कुछ ऐसी बातें जो कभी नहीं सुना होगा।
सतयुग
सतयुग के लिए माना जाता है कि इस युग में भगवान राम ने रावण का वध करने लिए जन्म लिया था, क्योंकि जब-जब इस धरती पर पाप बढ़ा है तब -तब भगवान ने इस धरती को अपना विराट रूप दिखाया है। सतयुग में धरती पर आत्माओं का वास हुआ करता था जिसे “वर्ल्ड ऑफ़ सोल” भी कहा जाता है।
जैसे हर शरीर का अंत होता है ठीक वैसे ही एक समय का अंत भी आता ही है। ऐसा माना जाता है कि सतयुग कि 1,728,000 बाद खत्म होती है, जिसमे एक सामान्य व्यक्ति एक लाख साल तक जी सकता है जिनका कद 32 फुट लम्बा हुआ करता था। इस युग में इंसान अपनी इच्छा अनुसार मर सकता था।
त्रेतायुग
हिन्दू धर्म में श्रीराम, श्रीविष्णु के दस अवतारों में, सातवें अवतार हैं। लेकिन यह रहस्य बहुत कम लोगों को मालूम है कि श्रीराम की मृत्यु कैसे हुई? दरअसल भगवान श्रीराम की मृत्यु एक रहस्य है जिसका उल्लेख सिर्फ पौराणिक धर्म ग्रंथो में ही मिलता है।
पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्रीराम ने सरयु नदी में स्वयं की इच्छा से समाधि ली थी। इस बारे में विभिन्न धर्मग्रंथों में विस्तार से वर्ण मिलता है। श्रीराम द्वारा सरयु में समाधि लेने से पहले माता सीता धरती माता में समा गईं थी और इसके बाद ही उन्होंने पवित्र नदी सरयु में समाधि ली।
चारों युग में हनुमान जी एक मात्र ऐसे भगवान हैं जो अमर हैं, त्रेतायुग में भी हनुमान जी ने भीम को चारों युग के बारे बताया था, किस युग में क्या होता ये भी बताया था।
जानकारी के लिए बता दें त्रेतायुग 4 ,32 ,000 वर्षों का होता है, जिसमे एक सामान्य इंसान 10 ,000 साल तक जी सकता था। इस युग में भीम ने हनुमान जी को चारों युग के ज्ञानी के नाम से सम्बोधित किया था।
जब द्वापर युग में गंधमादन पर्वत पर महाबली भीम सेन हनुमान जी से मिले तो हनुमान जी से कहा – ” हे पवन कुमार आप तो युगों से प्रथ्वी पर निवास कर रहे हो, आप महा ज्ञान के भण्डार हो, बल बुद्धि में प्रवीण हो, कृपया आप मेरे गुरु बनकर मुझे शिष्य रूप में स्वीकार कर के मुझे ज्ञान की भिक्षा दीजिये”.
तो हनुमान जी ने कहा – “हे भीम सेन सबसे पहले सतयुग आया उसमे जो कामना मन में आती थी वो कृत (पूरी) हो जाती थी इसलिए इसे क्रेता युग (सत युग) कहते थे इसमें धर्म को कभी हानि नहीं होती थी उसके बाद त्रेता युग आया। इस युग में यज्ञ करने की परवर्ती बन गयी थी इसलिए इसे त्रेता युग कहते थे। त्रेता युग में लोग कर्म करके कर्म फल प्राप्त करते थे.”
“हे भीम सेन फिर द्वापर युग आया इस युग में विदों के चार भाग हो गये और लोग सत भ्रष्ट हो गए। धर्म के मार्ग से भटकने लगे है, अधर्म बढ़ने लगा, परन्तु हे भीम सेन अब जो युग आएगा, वो है कलयुग, इस युग में धर्म ख़त्म हो जायेगा, मनुष्य को उसकी इच्छा के अनुसार फल नहीं मिलेगा, चारो और अधर्म ही अधर्म का साम्राज्य ही दिखाई देगा।”
द्वापरयुग
यह युग 8,64, 000 वर्षों का था, जिसमे एक प्रत्येक व्यक्ति 1000 साल तक जी सकता था, ऐसा माना जाता है जैसे- जैसे धरती पर पाप बढ़ेगा वैसे-वैसे इंसान की जीने की उम्र और उसकी इच्छा की पूर्ती कम होने लगेगी। हनुमान जी का कहना था कि द्वापरयुग में लोग धर्म के मार्ग से भटकने लगेंगे और धरती पर पाप बढ़ने लगेगा। जैसे कि आप सभी जानते हो इस युग में विष्णु जी ने खुद श्री कृष्णा का अवतार लेकर कंस को मौत के घाट उतारा था।
कलयुग
ऐसा माना जाता है कि कलयुग में एक आत्मा का जन्म 45 बार होता है और उसकी उम्र 100 साल तक की होगी । इस युग में इंसान पर्यावरण को तहस नहस कर देगा, और इस युग में इंसान की इच्छा पूर्ती कम हो जाएगी और वे पाप का भागीदार बन जाएगा।
कलियुग के अंतिम काल में भगवान विष्णु का कल्कि अवतार होगा। यह अवतार विष्णुयशा नामक ब्राह्मण के घर जन्म लेगा। भगवान कल्कि बहुत ऊंचे घोड़े पर चढ़कर अपनी विशाल तलवार से सभी अधर्मियों का नाश करेंगे। भगवान कल्कि केवल तीन दिनों में पृथ्वी से समस्त अधर्मियों का नाश कर देंगे।
माना जाता है कि कलियुग में अंतिम समय में बहुत मोटी धारा से लगातार वर्षा होगी, जिससे चारों ओर पानी ही पानी हो जाएगा। समस्त पृथ्वी पर जल हो जाएगा और प्राणियों का अंत हो जाएगा। इसके बाद एक साथ बारह सूर्य उदय होंगे और उनके तेज से पृथ्वी सूख जाएगी।
कृपया सुझाव एवं विचार अवश्य प्रस्तुत करें।