एक दम्पति साठ साल से शादीशुदा थे। दोनों अपने सारे सुख-दुःख आपस में साझा करते थे । उन दोनों ने एक दूसरे से कभी भी कुछ भी नहीं छुपाया फिर भी एक रहस्य था जो पति के लिए अभी तक अनसुलझा था। दरअसल पत्नी के पास एक स्टील का एक डब्बा था जिसे वह शादी के समय ही साथ लायी थी । उस डब्बे को वह अपनी अलमारी के सबसे ऊपर वाले खाने में रखती थी पर उसने शादी के पहले ही दिन अपने पति को साफ साफ बता दिया था कि वह कभी भी उस डब्बे के बारे में उससे कुछ ना पूछे और न कभी भूल से भी उस डब्बे को खोले। पति को कभी - कभी बैचेनी तो होती थी उस लॉकर के बारे में जानने के लिए पर वह पत्नी से किये वायदे से बंधा था । वह जब भी उस डब्बे को देखता , उसे वह डब्बा खोलने का मन होता फिर भी वो किसी तरह सब्र किए रहा। उसने पत्नी से उस बॉक्स के बारे में कभी भी कोई बात नहीं की। एक बार वह बुजुर्ग पत्नी बहुत बीमार हो गयी। डाक्टरों ने कहा कि अब उसका बचना मुश्किल है। अब पति से रहा नहीं गया । वह बॉक्स निकाल कर पत्नी के पास ले ही आया और उससे बोला कि मैंने तुम्हारी बात मानकर आज तक न तो इस डब्बे के बारे में कभी तुमसे कुछ पूछा और न ही इसे खोलने की कोशिश की । अब तो हम बिछुड़ रहे हैं इसलिए जाने से पहले अगर इस राज पर से तुम खुद से पर्दा हटा देती तो मैं भी सकून की मौत मर पाता। आखिरी साँसें गिन रही पत्नी ने पति की बात रख ली । उसने एक चाबी देकर उससे डब्बा खोलने को कहा। डब्बा जब खुला तो पति ने देखा कि अंदर नब्बे रूपये और चने के तीन दाने मौजूद हैं। पति ने हैरान होते हुए उन चीजों के बारे में पूछा।
पत्नी बोली, ” जब हमारी शादी हुई थी , तब मेरी मां ने मुझे कहा था कि सुखी वैवाहिक जीवन के लिए कभी पति का अपमान मत करना और यदि कभी ऐसा कर ही बैठो तो अपनी यह गलती याद रखने के लिए डब्बे में चने का एक दाना डाल देना ।” बुजुर्ग पति का जी धक्क से रह गया। फिर भी उसने यह सोच कर कि साठ साल के सुखमय विवाहित जीवन में उसकी पत्नी ने सिर्फ तीन बार उसका अपमान किया है , वह संयत बना रहा । वह सोचने लगा कि अब तो इसकी चला चली की बेला है ,अब इन सब बातों को दिल में रखने से क्या फायदा? बेहतर है इससे जुड़ी शिकायतें भी इसी के साथ खत्म हो जांए। खुद पर कंट्रोल कर वह बोला, 'हनी, चने के दानों के बारे में तो तुमने बता दिया अब यह भी बताओ कि ये नब्बे रुपए इस बॉक्स में क्या कर रहे हैं ?
पत्नी बोली, “अरे चने खराब हो रहे थै तो मैंने इसमें से ढाई किलो चने बेच दिए हैं। ये नब्बे रुपए उसी के हैं। ”
द्वारा शिवनाथ बिहारी 🙏 संकलित राजीव वर्मा
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