✨ कविता ✨ पता ही नहीं चला

राजीव वर्मा

कैसे कटा 1991 से 2024
तक का यह सफ़र,
पता ही नहीं चला ।

क्या पाया, क्या खोया,
पता ही नहीं चला !

बीती जवानी
आया बुढ़ापा,
पता ही नहीं चला ।

कल बेटा थे,
कब ससुर बन गये,
पता ही नहीं चला !

कब पिता से
नाना बन गये,
पता ही नहीं चला ।

कोई कहता बुड्ढा,
तो कोई कहता पापा,
क्या सच है,
पता ही नहीं चला !

पहले माँ बाप की चली,
फिर पत्नी की चली चाल,
फिर चली बच्चों की,
अपनी कब चली,
पता ही नहीं चला !

पत्नी कहती
अब तो समझदार हो जाओ,
क्या समझूँ,
क्या न समझूँ,
पता ही नहीं चला !
       
दिल कहता जवान हूँ मैं,
उम्र कहती बुजुर्ग हूं मैं,
इस चक्कर में कब,
घुटनें घिस गये,
पता ही नहीं चला !

सफेद हो  गये बाल,
लटक गये गाल,
कब बदली सूरत और चाल
पता ही नहीं चला !

समय बदला,
मैं बदला
बदल गये मित्र-मंडली
कितने छूट गये,
कितनी रह गये
पता ही नही चला

कल तक मस्ती करते थे
कब सीनियर सिटिज़न बन गये,
पता ही नहीं चला !

नाती, पोते, की खुशियाँ आई,
कब मुस्कुराई उदास ज़िन्दगी,
पता ही नहीं चला ।

जी भर के जी लो प्यारे
फिर न कहना कि कब आ गयी मौत
मुझे पता ही नहीं चला

Published by

Unknown's avatar

Rajeev Verma

Thanks For watching. Note:- ALL THE IMAGES/PICTURES SHOWN IN THE VIDEO BELONGS TO ME. I AM THE OWNER OF ANY PICTURES SHOWED IN THE VIDEO ! DISCLAIMER: This Channel DOES NOT Promote or encourage Any illegal activities , neither any services of any child is taken in this video making, all contents provided by this Channel is meant for Sharing Knowledge and awareness for health only . Rajeev Verma #HealthyFeasting. I Loves to post videos on Preventive Health Maintenance Food Recipes. Subscribe my YouTube Channel NOW. http://www.youtube.com/c/HealthyFeasting

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.