भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम लेखक : राजीव वर्मा, देहरादून

कृष्ण भगवान के 108 नाम और उनके अर्थ-


1. कृष्ण – आकर्षित करने वाला, विश्व का प्राण, उसकी आत्मा।

2. कमलनाथ – भगवान विष्णु, कमला के भगवान।

3. वासुदेव – श्री कृष्ण के पिता, धन के भगवान।

4. सनातन – शाश्वत या ‘हमेशा बना रहने वाला’, अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त।

5. वसुदेवात्मज – वासुदेव के पुत्र

6. पुण्य – अति शुद्ध

7. लीलामानुष विग्रह – मानव जाति को भूतकाल प्रदर्शन करने के लिए मान लेना

8. श्रीवत्स कौस्तुभधराय – श्री वत्स और कौस्तुभ रत्न पहने

9. यशोदावत्सल – माँ यशोदा का प्यारा बच्चा

10. हरि – प्रकृति के भगवान

11. चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा – चार भुजा शास्त्र धारण किये हुए।

12. सङ्खाम्बुजा युदायुजाय – सुदर्शन-चक्र, एक तलवार, गदा, शंख-कमल, कमल का फूल, और विभिन्न वाटों को धारण करने वाले।

13. देवकीनन्दन – माता देवकी के पुत्र

14. श्रीशाय – श्री (लक्ष्मी) का निवास

15. नन्दगोप प्रियात्मज – नंदा गोप का प्यारा बच्चा

16. यमुनावेगा संहार – यमुना नदी की गति को नष्ट करने वाला

17. बलभद्र प्रियनुज – बलराम का छोटा भाई

18. पूतना जीवित हर – राक्षसी पूतना को मारने वाले

19. शकटासुर भञ्जन – दानव शकटासुर का संहारक

20. नन्दव्रज जनानन्दिन – नंद और ब्रज के लोगों के लिए खुशी लाने वाला

21. सच्चिदानन्दविग्रह – अस्तित्व, जागरूकता और आनंद का अवतार

22. नवनीत विलिप्ताङ्ग – भगवान जिनका शरीर माखन से लिप्त हो।

23. नवनीतनटन – मक्खन के लिए जो नाचते हैं।

24. मुचुकुन्द प्रसादक – प्रभु ने मुचुकुन्द को धारण किया

25. षोडशस्त्री सहस्रेश – 16,000 महिलाओं के प्रभु

26. त्रिभङ्गी – तीन बल (गर्दन, कमर और पैर में) देकर खड़ा

27. मधुराकृत – आकर्षक रूप

28. शुकवागमृताब्दीन्दवे – सुकदेव (शुका) के अनुसार अमृत का महासागर

29. गोविन्द – जो गायों, भूमि और संपूर्ण प्रकृति को प्रसन्न करता है।

30. योगीपति – योगियों के भगवान

31. वत्सवाटि चराय – बछड़ों की देखभाल, उन्हें चराने वाले

32. अनन्त – अंतहीन भगवान

33. धेनुकासुरभञ्जनाय – भगवान जो आस-दानव धेनुकासुर को हरा देते हैं

34. तृणी-कृत-तृणावर्ताय – बवंडर दानव त्रिनवार्ता का संहार करने वाले

35. यमलार्जुन भञ्जन – अर्जुन भगवान नारा के अवतार थे जो भगवान विष्णु के सबसे अच्छे दोस्त थे।

36. उत्तलोत्तालभेत्रे – धेनुका का संहार करने वाले

37. तमाल श्यामल कृता – उनका शरीर तामला के पेड़ की तरह है, बहुत ही काला।

38. गोप गोपीश्वर – गोपी और गोपियों का भगवान

39. योगी – योगियों में श्रेष्ठ; महान योगी

40. कोटिसूर्य समप्रभा – एक लाख सूर्य के रूप में चमकने वाले।

41. इलापति – जो ज्ञान के स्वामी हैं।

42. परंज्योतिष – परम ज्योति – पूर्ण प्रकाश

43. यादवेंद्र – यादव वंश के भगवान

44. यदूद्वहाय – यदुओं का नेता

45. वनमालिने – एक चांदी की माला पहने हुए

46. पीतवससे – पीले वस्त्र पहने हुए।

47. पारिजातापहारकाय – पारिजात फूल

48. गोवर्थनाचलोद्धर्त्रे – गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली से उठाने वाले।

49. गोपाल – गायों के रक्षक।

50. सर्वपालकाय – सभी जीवों के रक्षक

51. अजाय – जीवन और मृत्यु के विजेता

52. निरञ्जन – निष्कलंक भगवान

53. कामजनक – सांसारिक मन में एक उत्पन्न करने वाली इच्छाएँ

54. कञ्जलोचनाय – सुंदर आंखों वाले

55. मधुघ्ने – दानव मधु के संहारक

56. मथुरानाथ – मथुरा के भगवान

57. द्वारकानायक – द्वारका के नायक

58. बलि – शक्ति के भगवान

59. बृन्दावनान्त सञ्चारिणे – वृंदावन के बाहरी इलाकों के बारे में

60. तुलसीदाम भूषनाय – तुलसी माला धारण किये हुए

61. स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे – जिन्होंने स्यामंतका गहना का विनियोजन किया

62. नरनारयणात्मकाय – नारा-नारायण

63. कुब्जा कृष्णाम्बरधराय –

64. मायिने – जादूगर, माया के भगवान

65. परमपुरुष – सर्वोच्च

66. मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय – संसारवासी

67. संसारवैरी – भौतिक अस्तित्व के दुश्मन

68. कंसारिर – राजा कंस के शत्रु

69. मुरारी – दानव मुरा के दुश्मन

70. नाराकान्तक – दानव नरका का संहार करने वाले

71. अनादि ब्रह्मचारिक – जिसकी सीमा न हो; जिसका आदि न हो; जिसका आदि या आरंभ न हो। जो सदा से बना चला आ रहा हो।

72. कृष्णाव्यसन कर्शक – द्रौपदी के संकट का निवारण

73. शिशुपालशिरश्छेत्त – शिशुपाल का सिर धड़ से अलग करने वाले

74. दुर्यॊधनकुलान्तकृत – दुर्योधन के राजवंश का विनाशक

75. विदुराक्रूर वरद – दानव नरका का संहार करनेवाला

76. विश्वरूपप्रदर्शक – विश्वरूपा का प्रकटीकरण (सार्वभौमिक रूप)

77. सत्यवाचॆ – सत्य बोलने वाला

78. सत्य सङ्कल्प – सच्चे संकल्प के भगवान

79. सत्यभामारता – सत्यभामा के प्रेमी

80. जयी – हमेशा विजयी भगवान

81. सुभद्रा पूर्वज – सुभद्रा के भाई

82. विष्णु – भगवान विष्णु

83. भीष्ममुक्ति प्रदायक – भीष्म को मोक्ष दिलाने वाले

84. जगद्गुरू – ब्रह्मांड के पूर्वदाता

85. जगन्नाथ – ब्रह्मांड के भगवान

86. वॆणुनाद विशारद – बांसुरी संगीत के बजाने में एक विशेषज्ञ

87. वृषभासुर विध्वंसि – दानव वृषासुर के संहारक

88. बाणासुर करान्तकृत – भगवान जिन्होंने बनसुरा के शस्त्रों को जीत लिया

89. युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे – युधिष्ठिर को एक राजा के रूप में स्थापित करने वाले

90. बर्हिबर्हावतंसक – मोर पंख सजाये हुए

91. पार्थसारथी – अर्जुन के रथ चालक

92. अव्यक्त – अनभिव्यक्‍त

93. गीतामृत महोदधी – भगवद्गीता का अमृत युक्त एक महासागर

94. कालीयफणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुज – भगवान जिनके कमल के पैर कालिया नाग के हुड से रत्न धारण करते हैं

95. दामॊदर – कमर में एक रस्सी के साथ बंधे

96. यज्ञभोक्त – यज्ञ और तपों का भोक्ता और सम्पूर्ण लोकों का महान् ईश्वर तथा भूतमात्र का सुहृद् (मित्र

97. दानवॆन्द्र विनाशक – असुरों के भगवान का नाश करने वाला

98. नारायण – जो भगवान विष्णु है

99. परब्रह्म – परम ब्रह्म

100. पन्नगाशन वाहन – जिसका वाहक (गरुड़) देवराज सर्प है

101. जलक्रीडा समासक्त गॊपीवस्त्रापहाराक – भगवान जो गोपी के कपड़े छिपाते थे जबकि वे यमुना नदी में खेलते थे

102. पुण्य श्लॊक – प्रभु किसकी स्तुति करता है श्रेष्ठ गुणगान करता है

103. तीर्थकरा – पवित्र स्थानों के निर्माता

104. वॆदवॆद्या – वेदों का स्रोत

105. दयानिधि – करुणा का खजाना

106. सर्वभूतात्मका – तत्वों की आत्मा

107. सर्वग्रहरुपी – सम्पूर्णता

108. परात्पराय – महानतम से महान